पराली जलाने के बजाय इसका सही उपयोग कैसे किया जा सकता है और यह पर्यावरण एवं स्वास्थ्य को किस तरह से लाभ पहुंचाता है?

मुख्य बिंदु : पराली और पर्यावरण पर प्रभाव:

19 Sept 20241 min read
पराली जलाने के बजाय इसका सही उपयोग कैसे किया जा सकता है और यह पर्यावरण एवं स्वास्थ्य को किस तरह से लाभ पहुंचाता है?

मुख्य बिंदु : पराली और पर्यावरण पर प्रभाव:

  1. किसान पराली क्यों जलाते हैं?
    किसान पराली जलाते हैं क्योंकि उनके पास फसल कटाई के बाद अवशेषों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त समय और साधन नहीं होते। इसके अलावा, पराली का निपटान जल्दी करना होता है ताकि अगली फसल की तैयारी हो सके। इस प्रक्रिया में विकल्पों की कमी और जागरूकता की कमी भी शामिल है।
  2. पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पर प्रभाव:
    पराली जलाने से वायु प्रदूषण होता है, जिससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है। यह स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है जैसे कि सांस की बीमारियां, अस्थमा और फेफड़े के रोग। सुरक्षा के लिहाज से, यह आस-पास की वनस्पतियों और मानव जीवन के लिए भी खतरनाक हो सकता है क्योंकि आग का फैलाव अनियंत्रित हो सकता है।
  3. पराली ना जलाए, लोगों के स्वास्थ्य बचाए:
    अगर किसान पराली जलाने के बजाय इसे अन्य उपयोगी तरीकों में परिवर्तित करें, तो यह समाज के स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा। पराली जलाने से होने वाले धुएं और प्रदूषण से सांस लेने की समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं कम हो सकती हैं।
  4. पराली से पेलेट निर्माण और उनकी उपयोगिता:
    पराली को जलाने की बजाय इसका उपयोग पेलेट बनाने में किया जा सकता है। पेलेट एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत होते हैं, जिन्हें बायोमास ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है। इससे पर्यावरण को फायदा होता है और किसानों को भी आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है। पेलेट का उपयोग घरेलू और औद्योगिक दोनों ऊर्जा स्रोतों के रूप में किया जाता है, जो पर्यावरणीय संरक्षण में योगदान देता है।
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